Friday, 24 December 2021

नेतसिह सोढा राजपूत

 सोढा परमार राजपूत  विरद वखा'ण,,,,,,,नेतसिह  सोढा


वंश परमार दातार कुल  वाटडी।

              पुरापुरी धरम ऐ रीत  पारा'।

परमारा  सरीखी  रही तल प्रथ्वी। 

                  प्रथ्वी  सिरै नर  परमारा।


जोधारा' जिका'री कीर्ती अजूणी।

                     हजारा' वर्ष तक चलण  हारी।

आबु रा अधपती आद अनादरा।

                   धरा उजैण  रा छत्र धारी।


विक्रमादित्य  लै जीत  सहै वसुधरा।

                   कैही राज  मै  न्याय इन्साफ  कीधा।

भौज जगदेव दातार ओपम  भडा'।

                     दान  मे शीश बगसीस  कीधा'।


जिका'ना घणा धनवाद  दीजीयै।

                      दिनोदिन  चढते अमल  डौडा।

वंश परमार  विरै शाख पैंतीस  मा

                    शिरौमण सूर समसेर  सोढा'।


चंदण भड  सरीखा अखी जल  चारियौ।

                   विधौगत ख्यात जुग चार  वैहसी।

हेम  रा पहाड कर  वा'टिया हाथ  सु'

                     कालु'झर जीकण  री वात  कैहसी।


धाट धर धू'स अमराण गढ  धारियौ।

                      मारियो उसर  ना खाग  मैलै।

वजै निसा'ण हमरौठ  वजाडे।

                      भजाडै  शत्रुवा' ली संघ  भैलै।।


खि'वरै सरीखा अमर जस  खाटवा।

                       चा'वरी चडतै विरद  चायौ।

उझैला' ईदररै उरुप  आयौ।

                         पा'चसौ एक  हजार  जस  पौहर  मा'।

खि'वरै  कर दिया वाल खाली।

                         गीत तौ जिका'रा जुगो  जुग  गाईजै।

हसती कीरत नवखंड हाली।


हिम्मत रा कौट सबल नर  हाथला कहाला।

                         सुजस सुण अंजस  किनौ।

अरजण रा'ण चिमनैस नर आज दिन।

                          लाख पसाव दै सुजस लीनौ।


दान सन्मान  विद्वान  नर दिसंता'।

                    रा'स  सोढा' तणौ ना'ह राचै।

धर्म  रा कोट मनमोट नर एधूला'।

                          विरद वखा'ण  अनौपदान  वा'चे।

वंश परमार दातार कुल  वाटडी।।।।।।।।।।।।।।।।।।

Thursday, 19 August 2021

સોઢા પરમાર


  •  સોઢા પરમાર,,,,,,,,,


જોમબાઈ મા' ના ધાવણ ઉજાળયા,ખેલ ખાંડા નાં ખેલી,

એક તેતર ને કારણે ,વીરો એ અમુલા મસ્તક દીધાં મેલી,,,,,,,,


દાન દક્ષિણા બધે અપાતી,પણ મૂળી ની રીત નિરાલી,

શેશાજી એ સિંહ અર્પી ને , અહીં અદભુત ગાથા સર્જેલી,,,,,,,,


રાજા ભોજ ને વિક્રમ કુળ નાં, આ સોઢા પરમારો ની હવેલી,

લખધીર જી ,શેશાજી , મુંજાજી, ની નગરી છે આ અલબેલી,,,,,,,


મૂળી છે નગરી બહુમુલી , એની ગાથા શોર્ય ભરેલી,

માંડવ રાયે વાસ કીધો અહીં,થયી પરમારો ની બેલી,,,,,,,,


ચારણ બ્રાહ્મણ કવિ પંડિતે , જેને છોટી કાશી કહેલી,

કેકાણ તણી ઉમદા ઓલાદો,આ ધરતી મહીં નિપજેલી,,,,,,


ગઢ કે કિલાં નહોતા લોખંડી, કે નહોતી ઉંડી ખાઈ કરેલી,

તોય ઉભી છે અજય બની ,નગરી કોઇ ને નહીં,,, નમેલી,,,,,


    જય માંડવ રાયજી દાદા 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏નેતસિહ મહાસિહજી સોઢા ,,,,,,

Saturday, 31 July 2021

Sodha rajput itihas

 


सो धरती सोढाण,,,,,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏


कै  गोरा ने पटकिया,घाल नरां घमसाण

     ‌‌ मर मिटिया झुकिया नहीं,सो धरती सोढाण।।


सौरभ बांटी सिंध में,जस लीधौ राजस्थान।

         कीरत छाई कच्छ में,सो धरती सोढाण।।


परगटिया धर पारकर ,रज पराक्रमी राण।

    जिको धरा काज जुझिया,सो धरती सोढाण।।


पुंजराज सिंह पाको पारकर ,मद मेटण मुगलांण।

    चानिया वऴै न चढ़िया,,सो धरती सोढाण।।


अचल सिंह राणपुर हुवौ,रणछोड़ तणौ राण।

        पत राखी प्रजा तणी सो धरती सोढाण।।


गाम गाम कै प्रगटिया सूर संत सुजांण।

    पार नहीं ,,,,पीरां,,,तणौ,सो धरती सोढाण।।


रजवाडी सो रुतबो,अमट रहयो अमरांण।

     पाघ अनमी पारकरां सो धरती सोढाण।।


अमरांणो घणो उजऴो ,गढां हंदो गुमान,

     साखां पोखां सोवणो सो धरती सोढाण।।


संपत,,,सामरोटी,,,घणी,पारकर पाथुं प्राण।

     धरा धाटडी धज भली सो धरती सोढाण।।


आछौ देवऴ अकड़ी,वसे ,,,पिथोरो भाण।

   दरसण करतां दुःख मिटे,सो धरती सोढाण।।


छैल छबीलौ ,,,छाछरो,उजऴौ गढ अमरांण।

     कह कीरत काऴुंझरौ,सो धरती सोढाण।।


पावन धाम पिथल रौ ,उड़े धजा आसमान।

      भगत आवै देस रा सो धरती सोढाण।।

     ‌‌

    बाय नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏🙏

Thursday, 22 July 2021

Sodha

 


અશ આપે કે અધપતિ દે ગજ કે દાતાર સાવજ દે મુ સાવભલ પારકરા પરમાર,,,


કોઇ રાજા ઘોડાં ના દાન કરે, તો કોઈ હાથી આપે,પણ હે સૌથી ભલા રાજા તું મને 

જીવતો ,,,, સાવજ ,,,આપ,,,,


જમીન દાન દે કે જબર,લીલવળુ લીલાર,સાવજ દે મુ સાવભલ પારકરા પરમાર,,,


કોઇ જબરા રાજા જમીન ના દાન આપે,કોઈ પોતાનાં લીલાં માથા ઉતારી આપે,

પણ હે સોઢા પરમાર તારી પાસે હું સાવજ જ માંગુ છું,


ક્રોડપસા દે કવયંદ ને લાખપસા લખવાર , સાવજ દે મુ સાવભલ પારકરા પરમાર,,


તું ‌બીજા કવિઓ ને ભલે કરોડપસાવ લાખપસાવ દાન દેજે ,પણ મને તો હે પારકરા પરમાર સાવજ જોઇએ,,,


દોઢા રંગ તને દવુ સોઢા બુદ્ધિ સાર,મોઢે ઉજળે દે મને પારકરા પરમાર,,,


હે સારી બુદ્ધિ વાળા સોઢા પરમાર હસતું મોઢું રાખીને મને સાવજ દેજે,

એટલે હું રાજા ઓ ની કચેરી મા' તારા દોઢા વખાણ કરતો કરતો જ કસુંબો લયીસ

      મધરાતે માંડવ રાજ ના થાનક મા' જયી ને‌ સાચોજી એ અરજ કરી મારી લાજ‌

રાખજે દેવ,,, પાંચાલી ના ચીર પુર્યા વિઠલ તે વણજાર શરમ રાખી ,,સાચા,,,તણી 

જગદીશણ ગજતાર,,,, ત્યાં તો ત્રાડ‌ દેતો એક સિંહ નીકળ્યો,દોટ મુકી ને ,,,સાચોજી

એ તેના કાન ઝાલ્યા,બકરી જેવો થયી ને સિંહ ઉભો રહ્યો,,,,,પરમારે,,,બૂમ પાડી લ્યો 

કવિરાજ,,,,,સાચે,,,, સિંહ સમિપિયો કેસર ઝાલિયો કાન , હવે રમતો મુકી દે,,, રાણા,,,,પોકયો પરમાર ધણી,,,,ઓ બાપ સાચાજી તે કેસરી સિંહ નો કાન ઝાલી ને મને સમર્પણ ‌કરયો ,એ હું કબૂલી‌ લવું છું, મને દાન પહોંચી ગયો,,,

    હવે રમતો મુકી દે સોઢા પરમાર,,,,બાય,,,,નેતસીહ સોઢા રાજપૂત ક્ષત્રિય મુંબઈ 🙏🙏


,,

Sodha rajput ka itihaas

 


सोढा राजपूत चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य परमार उज्जैन के वंशज हैं,


सोढा राजपूत क्षत्रिय वास्तव में ,,,,, गोत्र,,, में काफी भरोसा करते हैं,


ओर अन्य राजपूत क्षत्रियों में शादी ब्याह करते हैं,,,,,


सोढा एक राजपूत वंश है, सोढा राजपूत परमार वंश की एक शुरवीर शाखा है,


सोढाओ का सीधा संबंध परमार साम्राज्य उज्जैन के साथ है,


आज लाखों की संख्या में सोढा राजपूत ,,, कच्छ गुजरात,,में ,,, सौराष्ट्र में,,,


 राजस्थान,,, में,,, सिंध के थारपारकर की मूल निवासी रहै है,


यह वंश २५०० साल यानी ढाई हजार साल पौराणिक राज वंश है,


इसी वंश में ,,, देवी नेतलदे,,, जिन्होंने हिन्दवा पीर श्री रामदेव जी महाराज से विवाह किया था,


लोकदेवता पाबूजी राठौड़ ने इसी महान वंश में से विवाह किया था,


सोढा राजपूत ,,,नौ कोटी ,,, मारवाड़ धणी राजा ,,,,धरणीवराह के ,,,वंशज हैं,


इसी सोढा वंश में लोकदेवता पीर श्री पिथोराजी दादा ने जन्म लिया था,


यह वंश आगे जाके जग प्रसिद्ध राजा वीर विक्रमादित्य,,,, राजा भोज,,, राजा


 जगदेव परमार,, जैसे सुरवीर दानवीर देव सम्मान राजाओं के वंशज हैं,


सोढाओ का इतिहास जैसा समृद्ध है , वैसे उनका ,,,लोकसाहित्य,, भी निराला है,


यह वंश की ,, लोककथाओ में ,,, सतीत्व,,, वीरता,,,आत्मतेज,,, बहादुरी,, देखने को मिलती हैं,


सोढा राजपूतों की संस्कृति,,,ओर ईतिहास की लोककथाओं में ,,,मुमल रांणो,,,


राणो काछबो,,,राणो रत्न,,,राणो खींवरौ,,,मोर थो टिले राणा,,,,मारा सायर सोढा,


पीर पिथोरा जी के भजन,,,,सोढां री ढाटकी बोली,,,,अमराणै रो सेहर सुठो,,


उथ रहे तो मांहजो मिठो,,,वगेरै लोक कथाओं में देखने को मिलता है,


लोक साहित्य में खास करके,,,, प्रेम,,, शोर्य,,, पराक्रमों की गाथाएं,,,, देखने को


 मिलती हैं,,, ग्रेट डायनासिटी सोढा परमार राजपूत क्षत्रिय,,,,


           बाय,,,, नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

Sunday, 18 July 2021

हमरोट छतीसी

 


हमरोट छतीसी,,,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा,,,,


सोढा अमरकोट रां ,सिर कटियां समसेर।

वाहे हणियां बैरहर ,बांका भारथ बैर ।।


एक एक सूं आगला, रांणां अमरकोट।

प्रगट हुवा परमार बै माणीगर मनमोट।।


जस दस दिस ओपी जिकां,लोपी नहं कुल लाज।

     दिया हजारां हेक दिन ,धाट तणां धजराज(घोड़ा) ।।


   रांणां अमरकोट रा , गया  जमारो जीत।

जयांरा मंगल धवल में गवरीजै जसगीत।।


लोक जठै रंको नहीं,नंह संको पर धाट

     सोढां जस डंको घुरै पाधर बंको ,,,,धाट,,,,


राव कला री बार में ,ईडर नगर अनूप।

        ‌‌बारै रायमालरै ,अमराणो इण रुप।।


पूरो सुख हमरोट पुर, लोक न जाणे ढंड।

      छोलां जल ,,,,लांबौ,,,,छिलै बड लागा ब्रहमंड।।


धाट  सुरंगी गोरियां,आदू कहवत एह।

     पदमणियां ,,,हमरोट,,, है,राख म संसो रेह।।


लागां कुसुम सरीस बप,ज्यांरै पड़े खरोट।

        हद नाजक हिरणियां है,मांझल ,,,हमरोट,,,,


घर घर में धीणां घणां,घर घर घुमै माट।

     राग रंग रलियावणो, घरपुड मांझल ,,, धाट,,,,


धन अमरांणो धाट धर,पदमणियां बिण पार।

     सह नारी ,,,,सिकोतरी,,,धरती सिंध धिकार,।।


,,,,लांबै,,,सर पाणी भरै,गोरी गात अनूप।

       ‌ज्यां आगे पाणी भरै,रंभ आलोकिक रुप।।


घुंघट पोलंदी नेहां,बोलंदी पिक बैण।

    ,,,गजगत,,,जावै गोरियां,लांबै सर जल लैण।।


मेहां छतीसां दूहडां , है बरणन,,,,,हमरोट,,,

      आ हमरोट छतीसी का मिनख सुणै ,,,,मनमोट,,,।। कवि श्री बांकीदास जी री


 ख्यात से सोढां परमारां री हमरोट छतीसी,,,, नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत,,,

Saturday, 17 July 2021

धरा सुरंगी धाट

 


धरा सुरंगी धाट,,,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा,,,,,,,


आथूण री धरा में ,,,,,धरा सुरंगी धाट,,,,आपरी उदारता अर मिनखपणै रै पांण 

 चावी है,

इण धरा री राजधानी ,,,, अमरकोट,,,नै प्रसिद्ध कवि,,,,तेजसी सादू भदोरा,,,,


अमरावती री उपमा देतां लिखियो है,,,,


अमरांणो अमरावती,धरा सुरंगी धाट

राजै सोढा राजवी पह परमारां पाट।।


सोढां आपरी दानशीलता अर मोटै मन रै पांण काव्य में सदैव माण पावता रहता है,


,,,,तेजसी सादू रे आखरां में ,,,,कीरत वरीयां काहला,दत वरीयां दोढाह,

                                    परणिजै सारी प्रथि ( पण) गाईजै सोढाह।।


इणी ,,,,सोढां रै पाटवी ,,, राणा ,,,जैभ्रम,,,,ने १२९१ वि, में झंफ देथा नै ,,,,खारोडा,,, गांव री जागीर अर राणा री पदवी देय आध बधायो,,,,


        बारै सै इकराणवै ,,,बारै गांव ब्रवीस

                 राणा पदवी रेणवां,सोढां की बगसीस,,,,,,बाय नेतसिंह सोढा,,,

Rajputana

 सोढा नेतसिंह महासिंह जी ,,,, राजपुताना ईतिहास वंशावली,,,, सोढा राणा फेसबुक पेज,,,, लाइक करे,,, 🙏 सोढायण ग्रंथ,,, बांकीदास जी री ख्यात,,,

मुहणोत नेणसी री ख्यात ,,,गोरीशंकर हिराचंद ओझा लिखित राजपुताना ईतिहास,,

चारणो की बिरदावली,,,,, संग्राम सिंह सोढ़ा री सो धरती सोढाण,,,,नोघणजी सोढा रो अमरकोट रा अगोणा राणा,,,,हमरोट छतीसी,,,,धरा सुरंगी धाट,,,,,राज राजोजी सिंधल सोढा के लेख,,,,,मुऴी परमार नो ईतिहास,,,,सचियाय देवी री आराधना,,,पीर श्री पिथोराजी दादा ना बखाण,,,, हरसिद्धि देवी सम्राट विक्रमादित्य री वार्ता,,,, अमरकोट री किरत,,,,,पारकरा परमार,,,,सिंह नु दान सांचोजी परमार,,,,एक तितर माटे सोढाओ नो संग्राम,,,,राणा रत्न सिंह जी सोढा अमरकोट री किरती,,, राणा खींवरा री‌ दातारपी,,,,राणा चंद्र सिंह जी अमरकोट री किरती,,,,ठा,लछमण सिंह जी सोढा छाछरो री किरत,,,, पाबूजी राठौड़ रा यशगाथा,,,, रामदेव जी पीर श्री यशगाथा,,,,धरा सुरंगी धाट पाट धणी परमार यशगाथा,,,,,परमार क्षत्रियों के वंशज की जानकारी,,, सांखला परमार रो यशगाथा,,, थारपारकर,,,, कच्छ,,,वागड़,,,मूली,,, राजस्थान,,,पुरे वर्ल्ड में फेले हुए सोढा राजपूत भाईयों का अपना फेसबुक लाइक करे सेर करें जय माताजी सा 🙏 जय राजपुताना एक बनो नेक बनो,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

Parkar me sodha parmara ki kirti

 


पारकर के सोढाओ की कीर्ति,,,,,,चंदन गढ चावो कीयो,जोधे मचायो जंग।लडयो साथ कल्यांण रो ऊवां राजपुताना ने रंग।।।रंग कला रंग महासिंगा रंग सघऴी रेहाण,रंग काऴुंझर रा डुंगरा तने रंग हो सोढा ,,,रांण,,,।।कले चडे होंकर करी ,वजी हांक वीराण ,गऴीये पड़ी तरवट गयो ,मेल फिरंगी माण।।,,,काऴुंझर,,,अंजस करें  ,अंजसे गढ,,,, अमराण,,,आप तणी धरा ऊजऴी कीधी तें कल्याण।।।।,,,करण,,,वीज ज्युं काटके ,जग दढवाई जोवाण,जाडां थलां मां झींकली ,रंग हो सोढा रांण।।।।भुरां दऴ भांजे ,गांजे प्रसाणा जीत गढ,महिपत खग भांजे ,,,पारकरो,,,,रण पोढयो ,,  मान  मरजाद  सिरमोड ,धरती चांवा धींग,जश गीत रहया जुगाजुग रंग  कला महासिंह।।।जे  महासिंग कले जितां,मर्द सुनंदा धरमांय ,तो फिरतो नहीं मुल्क पारकर मांय।।।मुल्क में कला महासिंह भलां जनमिया भूप,फिरंगी उपाय उपनया उमा रजवट अनूप।।।मरया नहीं माणीगर कीधा करोड़ काज, स्वतंत्रता ये तमर में अंजशे आज।।।भोदेसर जे भर में हिन्दू रहन  था लख हजार,पण कलजी जेहडो कोन थियो  ,जे तरवट हां कै तकरार।।।राजन अदको राणपुर,राण अचलसिंग रंग, भ्रात बंक भोदेसरा रा ,वरवणो धन कवीयंग।।।,,काऴुभा,,हिर ने कहुं ,रोज प्रभाते रंग,हिर सुतन रतनेस हर ,सह विधी विधया सुजान।,,,अलजी,,,सोढा रंग अपु,बिल्ध भाग्य लखाण ,बके बताई वीरता ,तरवट से खग ताण,भुरार दऴ भांजीया,कहुं रंग कल्यांण।। कट मूआ कल्यांण सत ,रजपुतां उण रंग,कोऴी संग कल्यांण ये ,कटरण आया काम।।।गंभीरसिह जसुभा गणां,तीनों भड तरसींग,वाऴयो वेर माना वंका राणजी आदी रंग।।। परगटिया धर पारकर रज पराक्रमी राण जिको धरा काज झुझिया सो धरती सोढाण रजवाडी सो रूतबो अमट रहयो अमराण पाघ अनमी पारकरा सो धरती सोढाण बाय नेतसिंह सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

Saturday, 3 July 2021

सोढा राजपूत

 


રજવાડી સો રુતબો ,અમટ રહ્યો ,,,અમરાણ,


      ‌‌પાઘ અનમી ,,,પારકરા,,,આ ધરતી સોઢાણ,


અમરગઢ છે અમરકોટ ,,,, અકડી,,,પત રી આણ,


    સાખ સુરંગી અહીં રી આ ધરતી ,,,,સોઢાણ,,,,


અમરાણો અમરાવતી ધરા સુરંગી ,,,ઢાટ,,,,,,,( ધાટ)


         સોઢા બિરાજે રાજવી પાટ ધણી ,,,,,પરમાર,,,,


પરગટિયા ધર પારકર રજ પરાક્રમી રાણ,


     જિકો ધરા કાજ ઝૂઝિયા સો ધરતી સોઢાણ,


વણ વણ ,,ઢાટ,,,રો બોલે રંગ ,,,ખીવરા,,,,રાણ,


       થોહર થોહર રસોડો આ ધરતી ,,,,,સોઢાણ,,,,


પિથલ રાવત રી ધરા ,દેવલ રા દીવાણ 


   માન ,,,,સચિયાય,,,,,માલહણ,,,,સે  આ ધરતી સોઢાણ,


રાણો ,,,,કાછબો,,,,રિણમલા' મુંમલ ઝાઝો માન


    ‌ગાઈજે પગ પગ ગીત આ ધરતી સોઢાણ


છૈલ છબીલો ,,,છાછરો,,,ઉજળો ગઢ ,,,અમરાણ,


     ગંગા ધામ કાળુઝર,આ ધરતી સોઢાણ,


અટલ વસુંધરા,,,ઢાટ,,,અટલ નગર અમરાણ


    અટલ ધરા ,,,,,સામરોટી,,,,,આ ધરતી સોઢાણ,


    રતોકોટ સૈનાણ ,,,ગઢ ,,,સોઢાણ,,,, 🙏🙏🙏


     ‌અખીતાણ અમરાણ ગઢ‌સોઢાણ🙏🙏🙏

सोढा राजपूत समाज का इतिहास

 


સોઢા દરબાર ફોટો,,,,,વંદે વારંવાર પાંચાલ કેરા પાટ મા


પદ સોઢા પરમાર મૂળી માંડવ રાયજી,,,,


સુરજ કરો સહાય આશિષ માંગુ એટલા


     માન જીવતર માંય , યાચું કાયમ ,,,નેતસિહ  ભા,,,,


દિસ પૂર્વ નાં દેવ ઊગે   ધર ઉજવાળવા


    સહાય કરો સદૈવ, યાચું કાયમ ,,,,નેતસિહ ભા,,,,


સાતે ઘોડે સવાર,,,,, અવની,,, ને અજવાળવા,


    ‌કાશપ નાં કુમાર ,આવે કાયમ આગવા,,,,


ધર પાંચાળે ધામ ,મેરુ સોહે માંડવો


    ‌‌કરતા સરવા કામ મુળી માંડવ રાયજી,


કિરણુ લયી કિરતાર,આવે અસવે ઉગતા 


    પ્રથવી મા ,,,,,પરમાર,,,,,માને માંડવ રાયજી,


,,,,શેશાજી,,,, નાં સાચ ,,,પરમાર,,,,નમે પ્રેમ થી


     દીધાં ,,,,સાવજ ,,,,દાન મુળી માથે માથે માંડવા,,,,

Sodha parmar

 શિવવાડી ,,,સચિયાય ,,,,રો આદૂ ઈસ્ટ અનૂપ,,


,,,,,સોઢે,,,, ને વર સમિપિયૌ ,ભયૌ ,,,,ધાટ,,,( ઢાટ) રો ભૂપ,,,,


સોઢો ,,,,સિરજૈ શાન સૂ   રાખે કદી ન રીસ 


,,,,સચિયાય,,,,સદા સહાય ,જતન કરે ,,, જગદીશ,,,,


સહાયક સોઢા વંશ રી , મા સચિયાય માન,


વાર કરી ,,,,વાઘ,,,( સાખલો) રી  આ ધરતી સોઢાણ,,,


શિવવાડી સચિયાય આવે કર્યો સરરાણી , સોઢા ઉઠે ખડગ સંભાલ,ઢાટ દીયો ધણીયાણી,,દળ દેખે બળ દાખ, ખાગ ઉજળ ખટકે,સોઢા અને સુમરા ઝીંક મા તો ઝટકે, છત્રીસ અસૂર રહ્યા ખસૈ. ,હુરાવર હલાવ્યા  સવંત બારે સો બયાસીયૈ સોઢોજી અમરાણે આવીયા,,,,,


ઉંચો શિખર આબુ જ્યાં સોઢા કુલ શિરતાજ સતી દાતાર સુરમા અખી ધરા જશ આજ ,ભુવા સચિયા ભગવતી ઉમા તણો અવતાર,વળે હૂવો આ વંશ મા ,,,પિથલ,, સિંહ પરમાર,,,,,,


Sodha rajput itihas

 


નેતસિહ મહાસિહજી સોઢા રાજપૂત,,,, 


પારીનગર રી પાળ,રાજા ,,,, ચંદન,,,રી રેહાણ,

કરોડ દે દાંતણ કર્યો,આ ધરતી સોઢાણ,,,


વ્હાલી મુમલ મારવી,જુગ રી જોડી જાણ,

પ્રેમ રી ધારા વહેતી આ ધરતી સોઢાણ,,,,


કીરત જગ  મેં મોકળી ,ભગતી હંદા ભાણ,

મહીમા,,,દૂજુ,,,મહેશ,,,,,રી આ ધરતી સોઢાણ,,,


હરે વસાઈ હરયાર,,,,સગતિયા તણો માન,

,,,માલણ,,, તણાં ઉપકાર આ ધરતી સોઢાણ,,,


,,,ચંદન સિંહ,,,સુરતાણ,,,ગઢપતિ ,રિધ સિંધ મોટા રાણ,,

કોટ રતો સલામ અહીં આ ધરતી સોઢાણ,,,


પીલુડા ,,,પારકર મા ,નંદન વન અમરાણ ,

,,,મોહરાણો,,,મુલ્ક મલીર આ ધરતી સોઢાણ,,,,


પિથલ રાવત રી ધરા દેવલ રા દીવાણ,

માન સચિયાય માલહણ સે આ ધરતી સોઢાણ,,


,,, પુંજરાજ સિંહ,,,,રે હાથ પડતાં,પઠાણ રો ગયો પ્રાણ,

પારકર રી રાખી પત આ ધરતી સોઢાણ,,,


મડદ હા ,,,કલજી ,,,,મહાસિગ,,તીખા સહ્યા બાણ,

તરવટ લીધી ત્રણ તલાક આ ધરતી સોઢાણ,,,

Tuesday, 15 June 2021

Sodha rajput itihaas

 


#धाट,,,,,#किराडू,,,,,,#पारकर,,,,,#लोदरवौ,,,,,,,,,,#जालोर


#आबू,,,,,,,#पूंगल,,,,,,,#नागोर,,,,,से,,,,,#नवकोटां,,,,,,#मंदोर,,,,


अग्नि वंशी परमार क्षत्रियों का इतिहास उज्जवल रहा है,


लगभग संपूर्ण उत्तर पश्चिम भारत सहित काबूल कन्धार से लेकर काबा तक 


परमार क्षत्रियों का एक छत्र शासन रहा।


वीर विक्रमादित्य राजा भोज शीशश दानी जगदेव परमार, यशस्वी राजा ,,,,,चंदन,,,,,


संत शिरोमणि पीर श्री पिथोराजी,अवतारी राणा खींवरा, स्वतन्तत्रता सेनानी बाबू 

   

,,,,,कुंंवरसिह,,,, जैसे अनेकानेक सत पुरुषों ने  परमार वंश में कर्तिस्तम्भ को ओर 


भी ज्वाजलयमान किया।


क्षत्रियों में परमार वंश ही एक ऐसा वंश है , जिसमें शक्ति ने  सात बार अवतार लिया


भगवती सच्चियाय,वांकल देवी,माल्हण माता,सोहाय माता,हंसावती देवी,रुपादे


 देवी,ओर लालर देवी 🙏 ये सात परमार शक्ति यां आज भी पूजी जाती है,


इसी परमार वंश के ,,,,, राजा बाहडदेव,,,,, जिन्होंने बाड़मेर की स्थापना की,


इन्हीं बाहडदेव के पुत्र ,,,,, राजा चाहडदेव,,,,,का विवाह संयोग वश इन्द्र की परी‌ से 


हूआ था, उन्ही इन्द्र की ,,,,अप्सरा ,,,से ,,,,चाहडदेव,,,,,की तीन संतान हुई,।।


,,,,सच्चियाय,,,,, जिन्हें लगभग सारा परमार वंश अपनी ,,, इष्टदेवी,,,,,,,, कुलदेवी,,,


के रूप में पूजता है, दो पुत्र हुए,,,, सोढा,,,,, ओर ,,,,,,सांखला,,,,, हुए,,,


बहिन शक्ति ,,,,सच्चियाय,,, की कृपा से ,,,,,सांखला जी,,,,, बीकानेर की तरफ चले


 गए। ओर उस क्षेत्र में शासन किया, उनके वंशज ,,,, सांखला,,, परमार कहलाते हैं


दूसरे भाई ,,,, सोढा जी,,,,को देवी ने वरदान दिया कि तुम ,,, पश्चिम,,, में जाकर


 अपना राज स्थापित करो, देवी के आशिर्वाद से ,,, सोढा जी,,,, ने विक्रम संवत,


१२८२ में सिंध के क्षेत्र के ,,,,रतोकोट,,,,,(रेड फोर्ट) पर रता मुघल को हराकर


 अधिकार किया,इस सम्बंध में एक ,,, सवैया,,,, प्रचलित है,,,


         शिववाड़ी सच्चियाय आय कहयो सिरेराणी 


सोढा उठ खम साज ,,,धाट,,,दियो  धणियाणी।।

        

           दल देखें मेल प्रत दाख खाग ऊजऴा खटके।


सोढां मुघलां सुमरां झींक ज वाजयो झटके।।


        खट असुर वीस त्रुटां खगां हुरावर हलावियै 


सवंत बारह सो बैयासिये ,,,,,सोढोजी,,,,रतेकोट,,,,आवियो 


जय मां हरसिद्धि देवी,जय मां सचियाय देवी,जय मां देवलजी,,जय पीर श्री पिथोराजी दादा 🙏🙏🙏🙏🙏नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

Saturday, 5 June 2021

Netsingh sodha rajput

 સોઢા દરબાર ફોટો,,,,,,,નેતસિહ સોઢા,,,,,,,,,,,, એક તેતર ને કારણે,,,, સૌરાષ્ટ્ર ની રસધાર,,,,, પરશુરામે આ પ્રથવી ને એકવીસ વાર,,,,નક્ષત્રી  કરીને બ્રાહ્મણો ને વહેંચી દીધી, પણ એ વિના મહેનતે મળી ગયેલી ધરતી નું રક્ષણ બ્રાહ્મણો ન‌ કરી શકયા, અસુરો ધરતી માતા ની ‌કાયા ને ખૂંદવા લાગ્યા, ત્યારે દેવતાઓ ભેળાં થયી ને 

,,,, આબુ, પર્વત ઉપર એક ,,,, અગ્નિ કુંડ,,,, પ્રગટાવ્યો,એ અગ્નિ કુંડ ની ‌ઝાળ મા 

ચાર મોટા દેવતાઓ એ,,,જવ,,ના દાણા છાંટયા તેજ ઘડી એ એક પછી એક ‌ચાર 

વીરો પ્રગટ થયા, સોળે કળાએ શોભતો‌ નર નીકળ્યો તે‌,,,,, સોલંકી ,,,કહેવાયો,,

ચારે ભુજાઓ મા હથિયાર ધારણ કરી ને હાજર થયો તે ,,,, ચૌહાણ ,,, કહેવાયો,

પછી પઢીયાર ઉત્પન્ન થયો, આખરે અગ્નિ ના ભડકા મા થી ‌,,,,માર,,,,માર,,,, ની ‌ત્રાડ 

દેતો જે બહાર આવ્યો, આવી ને ,,,પર,,,,નામ‌ના રાક્ષસ ને સંહાર્યો તે ,,,,પરમાર,,,,

નામે ઓળખાયો,,,, આબુ,,, ઉજૈણી,,, અને ચિત્તોડગઢ,,,, ઉપર તોરણ બાંધનાર 

આ પરમાર વંશ નો જ એક‌ પુરુષ હતો,એ વંશ નો એક વેલો સિંધ ના રણવગડા મા 

ઉતરી આવ્યો ,તે વેલો ચલાવનાર મૂળ પુરુષ,,, સોઢા જી પરમાર,,,,, હતા,

એજ સોઢા જી પરમાર દરબાર આજે પુરા વર્લ્ડ મા ફેલાયેલાં છે,,,, કચ્છ , સૌરાષ્ટ્ર, મૂળી,મોટી ભલસાણ , રાજસ્થાન, બાડમેર જેસલમેર પાલી‌ બીકાનેર થરપારકર સિંધ અને આખા વર્લ્ડમાં સોઢા પરમારો નો દબદબો છે,આજ વંશ મા સાચોજી 

લખધીરજી,રાણો ખીવરો જી પીર શ્રી પિથોરાજી, રાણા રતનસિંહ જી  રાણા ચંદ્ર સિંહ જી જેવા સુરવીર દાતાર  થયી ગયા છે જય હરસિદ્ધિ દેવી,જય સચિયાય દેવી,જય પીર શ્રી પિથોરાજી દાદા,જય માંડવ રાયજી દાદા 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 સૌરાષ્ટ્ર ની રસધાર,,,,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏🙏


Wednesday, 26 May 2021

Netsingh sodha ,,,पारकरा सोढा ओर धाट का सोढा ( ढाट,,,धाटेचा सोढा,,,,धरा सुरंगी धाट,,,,, पाट धणी परमार,,,,,केहर लंकी गोरीयां सोढा चतर सुजाण बड झुकियां लांबे तणां आयो गढ अमरांण,,,,नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

 सोढा राजपूत वेशभूषा,,,,,,,,,नेतसिंह सोढा राजपूत,,,,,,

,,,,धाटेचा,,,,,सोढा,,,,, तथा,,,,पारकरा,,,,, सोढा,,,,,सोढांण _ प्रदेश में ,,,धाट,,,ओर ,,,पारकर,,,,दो जिले आते हैं,यही प्रदेश सोढों का प्रमुख केन्द्र है,

इस प्रदेश के सोढा प्रायः ,,,,वीर,,,, एवं ,,,,दानी,,,,होते आते हैं

यह विशेषता उस प्रदेश की ही रही, जहां इतनी ,,,उदार,,, परंपरा प्रतिष्ठित हूई है,

जिस समय वर्तमान,,,,सोढायण _ प्रदेश पर सोढों का राज्य था,

उस समय ,,,धाट,,,, एवं ,,,, पारकर,,,,का एक ही क्षेत्र था,

,,,,छाहड,,,,के पुत्र,,,, सोढा,,,,से आगे छठी पीढ़ी में ,,,,धरावरीस,,,,( धरा वर्ष)

नामक राजा हूआ,यह ,,,,धरावरीस,,,,, एवं ,,,,,धरापसाव,,,,,, के नाम से प्रसिद्ध हुआ,बड़ा ,,, पराक्रमी,,,,, एवं ,, दानी,,,, था, इसके दो पुत्र हुए,,,,दुरजणसाल,,,

ओर‌,,,,आसराव,,,,,,,,आसराव के ‌वंशज पारकर के सोढे तथा दुरजणसाल के वंशज,,,,,,धाट के सोढे( धाटेचा) सोढे कहलाये,,,,,,धरा सुरंगी धाट,,,,,,,,

डॉ गौरीशंकर हीराचंद ओझा,राजपूताने का इतिहास, बीकानेर राज्य का इतिहास, प्रथम खंड पृ ७२ ,,,सोढायण पृ ४,,,,,,,,,

Wednesday, 19 May 2021

Sodha Rajput history

 સોઢા_ સોઢા એક રાજપૂત વંશ છે, સોઢા રાજપૂત પરમાર વંશ ની એક શુરવીર શાખા છે , સોઢાઓ નો સીધો સંબંધ પરમાર સામ્રાજ્ય ઉજ્જૈન સાથે છે , આજે લાખો ની સંખ્યા મા સોઢા પરમાર રાજપૂત કચ્છ ગુજરાત મા સૌરાષ્ટ્ર મા રાજસ્થાન મા સિંધ  ના થરપારકર ના મૂલ નિવાસી રહયા છે, આ વંશ ૨૫૦૦ સાલ પૌરાણિક રાજ વંશ છે આ વંશ મા દેવી નેતલદે જેણે હિનદવા પીર રામદેવજી મહારાજ સાથે લગ્ન કર્યા હતા  લોકદેવતા પાબુજી રાઠોડે આજ વંશ મા લગ્ન કર્યા હતા , સોઢા રાજપૂત નૌ કોટી મારવાડ ધણી રાજા ધરણીવરાહ ના વંશજ છે ,આ મહાન વંશ મા ‌પીર પિથોરાજી દાદા જન્મ લીધો છે,આ વંશ આગળ જતાં જગપ્રસિદ્ધ વિક્રમાદિત્ય,રાજા ભોજ રાજા જગદેવ પરમાર જેવા દાનવીર સુરવીર દેવ સમાન રાજાઓ ના વંશજ છે  સોઢાઓ નો ઈતિહાસ જેવો સમદ્ધ છે , એવું જ એનું લોકસાહિત્ય પણ નિરાલુ છે ,આ વંશ ની લોકકથાઓ મા  સતીત્વ , વીરતા, આત્મ તેજ , બહાદુરી ,ના રંગો થી રંગાયેલું છે , સોઢા રાજપુતો ના સંસ્કૃતિ અને ઈતિહાસ ની લોકકથાઓ મા  ,,,મુમલ રાણો,,,,રાણો કાછબો,,,,રાણો રતન,,,,મોર તો ટિલે રાણા,,,,,મારા સાયર સોઢા,,,,,,પીર પિથોરાજી ના ભજનો ,,,,,સોઢા રી ઢાટકી બોલી ,,,,,અમરાણે રો સેહર‌ સુઠો ,ઉથ રહે તો માહજો મિઠો ,,,,, વગેરે લોકકથાઓ મા જોવા મળે છે,,, લોકસાહિતય‌ મા ખાસ કરી ને પ્રેમ, શોર્ય,, પરાક્રમો ની ગાથાઓ જોવા મળે છે,,,,,જય મા હરસિદ્ધિ માતા જય પીર પીથોરાજી દાદા જય મા સચિયાય દેવી,🙏🙏🙏🙏🙏સોઢા રાણા 🙏🙏🙏રાજપુતાના ઈતિહાસ વંશાવળી મુંબઈ 🙏 netsingh sodha rajput Mumbai 🙏


Monday, 17 May 2021

Sodha Rajput mudi gujrat history

 


ईतिहास सोढा परमार का,,,,शरणागत पंखी रै सारु मरणिया,,,,, जोमबाई आपरै

 बेटे ,,,मूंजैजी,,,,ने आज्ञा दी कै,,,बेटा जिको राजपूत सेर सूत धारै उवो जे


 शरणाई री रक्षा में शंका करै तो उण ये माज नै में धूड है,आज म्हारो दूध


 ऊजलो करण रो अवसर है,,,,, इण अबोल तीतर री रक्षा कर,,,,,,आ मत


 सोचजै कै ए घणा थे थोड़ा हो,,,,,जस हमेशा सतधारियां रो रैवै,,,,, राजपूत


 तो आगे ई कीरत रै कारण सीस कटावता आया है,,,,, कापिया ज्यां सीस कीर्ती कारण ,क्षत्रियां आगै कहै ,,खंगार,


मां,,,,,,रा ऐ बोल सुण ,,,सोढो मूंजौजी,,,,मरण मतै हुय रण मेदान में आयो


जोर युद्ध हूवो जिण में ,,,सोढे मूंजैजी आपरी खाग रो पाणी बताय ,,,


टणकां रे आडी टग्ग दी,पण पग पाछा नी दिया, एक तीतर पंखी ने 


अभ्यदान देवण सारु एक वीर फूंटती मूंछां रे साथै वीरगति वर सरग पूगो


         खागां वागां खिर पडै ,परतन छोडै पग्ग

       रंग अणी रा रावतां,टणकां आडी टग्ग,।।


जिण वंश में भोज ,जगदे अर विक्रमादित्य जैडा दातार जनमिया उणी उजल


कुल में ,,,,मूंजौ,,,,जनमियो,,,,


         जिण कुल में जगदेव जिसा ,भोज जिसा दातार,


जिण  कुल बिको जनमियो,अईयो वंश,,,, पंवार,,,,,


इण तीतर री रक्षार्थ हुई लड़ाई रै‌ पेटे ,,,,कवि श्री बांकीदास जी ,आपरी ख्यात में लिखे,,,,,,,,


          पडै छवाहड पांचसो सोढा वीसां सात 


एकण तीतर वास्ते ईण राखी अखियात,,,,,छवाहडां ना मार पारकरां सोढां मूली लीधी,,,,,,


महादान जी रतनूं आपरी पोथी , यदुवंश जस प्रकाश,,,, में तीतर सारु मरणिये भडां 


रो एक जूनो दाखलो इण गत दियो है,,,,,


पैंतालीस पमार मुवा वीस खेर  मसाणी ,बार भाटी वरदेव ,त्रण रतनूं खूमाणी 


रण चौबीस रायका,सोल लसकरी सिपाई,,,,,,


जंग रचयो चहूं ओर घणा आवे बहु धाई , पटेल पांच‌ सुथार सात,बेढक आठ वजीर अति,,,,,,


        रण बांधी खाग रतनेस रो मूंजौ लडियौ महमती,


धिन है ऐडै सतधारी नर नारियां नै जिकै निस्वार्थ भावसूं एक पंखी रै कारण


आपरौ मिनख धर्म और राजपूती धर्म और क्षत्रिय धर्म निभायो सत सत नमन 🙏


बाय नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

Monday, 26 April 2021

परमार वंश history/ parmara Rajput history

 પરમાર વંશ,__ પર+ માર_ ‌પરમાર નો શાબ્દિક અર્થ થાય છે,,, શત્રુ ને મારવા વારો, શત્રુ ને પલવાર પણ ટકવા નો દિયે ,એવા વિર પુરુષ નું નામ પરમાર છે‌ જે અગ્નિ વંશીય‌ રાજપૂત વંશ છે,,,,પરમાર અથવા પંવાર,,,બંને એકજ છે,પરમાર  क्षत्रिय મધ્યકાલીન ભારત નું અેક અગ્નિ વંશીય‌ क्षत्रिय રાજવંશ છે,,,,૮ મી સતાબધી થી ૧૪   મી સતાબધી સુધી રાજ કર્યું છે,,,પરમાર રાજાઓ  મા સૌથી મોટા પ્રતાપી રાજા ‌વીર વિક્રમાદિત્ય નું શાશન આખા ભારત ઉપર હોવા નુ કહેવાય છે,,,પરમાર વંશ ની મૂલ નગરી આબુ ચંદ્રાવતી થી લયી ને માલવા ,,,,,ધાર,,,,,,, ઉજ્જૈન,,,, ગુજરાત,,,,અને સિંધ,,, અમરકોટ,,, સુધી પરમાર વંશિયો‌નો દબદબો હતો,,,, ત્રેતા યુગ વૈશાખ સુદ પાંચમ તિથિ,,,,પ્રથમ ,,,મેરધડ,,નિર્મલ વહે નદીયાણા,,,,,(૨) વાડી કુલ વનવાસ ‌વડો જાડ કુલ વખાણા,(૩) મલે  તેત્રીસ કરોડ દેવતા,,એક‌ અનલ,, કુંડ ‌ઉપાયો,અનલ કુંડ માંહી ઉત્પત્તિ રિખ વર્મા ઉપાવે,,,,,(૫) ચાર क्षत्रिय ઉપાયા,,, અગિયારસ ‌બુધવાર પઢિયાર,,,,,,સાતમ ને સોમવાર‌ સોલંકી,,,,,,, શુક્રવાર ચૌહાણ વત્સ ગૌત્ર ,,,,,,,,, તેત્રા યુગ કી વરસ અધલાખ વલતા વડો માસ વૈશાખ ,,,સુદ પંચમી,,,સવાઈ,,,,ચદલ મેમ રખેસરા દિપક પ્રગટયો ,,, આબુ,,, પરમાર,,,,ઉપજયો,,,,, ધોમ મન મેં રિસ ધારે,,,મેલ,,,,,ઉતાર એમરો પૂતલો ,,,બનાયો,,,,વચાડે યજુર્વેદ,,,સાયલ રિખ નામ સુણાયો,,,ઉપાડ ખગ,,,ઉઠ  હમાસર આપ,,, અગ્નિ વંશીય‌ પરમાર કહાયો,,,,,,(૬) પુર્ણ શાખા પેતીસ હૈ, વડ પરમારા વંશ,,, સોઢ,,,,,, પ્રમાણે જગ સહી ,,,અમરાણે,,,,અંશ,,,,,(૭) મુની વશિષ્ઠ જગ‌ મંડ્યો આબુ શિખર ઉતંગ,,(૭) ,,,અગન,,, કુંડ સુ ઉપના, ,,પહ શતરી ,,,,પરમાર,,,,,સોલંકી,,,,ચૌહાણ,,,,સમ પડિહાર,,,,,, પ્રથવી બડા,,,,પરમાર,,,,, પ્રથમી ,,,પરમારા તણી ,,,એક ઉજૈણી ધાર ,,, બીજો આબુ બેસણો,,,,,,જય હો ,,,ભોજ,,,,જગદેવ,,,કી,જય હો હરસિધ્ધિ દેવી કી જય મા સચિયાર,,,,, રાજપુતાના ઈતિહાસ વંશાવળી મુંબઈ 🙏netsingh sodha Rajput 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏👆🙏👆👆👆સોઢા પરમાર 🚩સાખલા પરમાર🚩ધાધુ  પરમાર🚩બારડ પરમાર🚩જાગા પરમાર🚩વરણ પાર🚩કાબા પરમાર🚩વહેલ પરમાર🚩પાએર🚩ગેલડા🚩ગૂગા🚩મોરી 🚩મેફાવત🚩મોહધા🚩ધારુઆ🚩વરાહ🚩લોદરવા🚩#Netsingh#sodhs


Sunday, 25 April 2021

हरसिद्धि माता 🙏

 

 જય મા હરસિદ્ધિ દેવી,,,,,, હરસિદ્ધિ ને હેત સુ ધ્યાવી રખણો ધ્યાન, ઉજૈણી અંજસ ઉઠી વિધ વિધ  હુવે વખાણ,,,,,,,,, હરસિદ્ધિ દેવી,,,,અરિગંજ ખાંડો,,,,,સાખા માધવસેન,,,,,,અગન વંશ ઉપાવિયા,,,,,,ખુદ આબુ કુળક્ષેત્ર,,,,,

વંશ અગ્નિ વંશ સોઢા પરમાર,,,,,,,,ગોત્ર વશિષ્ઠ,,,,, પ્રાચીન નગરી ચંદ્રાવતી,પારીનગર,,,,, પાઘડી પંચરંગી,,,,,,,, પરદુઃખ ભંજણ,,,વીર વિક્રમાદિત્ય,,,

સુવર્ણ દાનેશ્વરી,,,,સોઢા જી પરમાર,,,,,,,શીશ દાનેશ્વરી,,,જગદેવ પરમાર,,,,,

સિંહ દાનેશ્વરી,,,શેશાજી સોઢા પરમાર,,,,,,મહા દાનેશ્વરી,,,રાજા ભોજ,,

ક્ષમા દાન,,,,મહારાજા મુંજદેવ,,,,,,,કરોડ પશાવ કરનાર,,,,, રતનસિંહ જી પરમાર,,

રાજયોગી,,,,ભરથરી નાથ,,,,,,,સંત શિરોમણી,,,,,,  જાભોજી,,,પીર શ્રી પિથોરાજી

પાઘડી,,,, પંચરંગી,,,,,,, તલવાર,,,રણતર,,,,, બેસણું,,, આબુ, ઉજૈણી ધાર,,,,,

પ્રથમ પુરુષ,,,,,પરમાર,,,,,,,,,,,જય મા હરસિદ્ધિ દેવી,,,,,જય મા સચિયાય દેવી,,,

જય મા દેવલ દેવી,,,જય મા માલણ દેવી,,,જય પીર શ્રી પિથોરાજી દાદા,, 🙏🙏

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,બાય નેતસિહ મહાસિહજી સોઢા રાજપૂત ક્ષત્રિય મુંબઈ,,,,,,,,,,,,


Saturday, 24 April 2021

राजपूत संस्कार

राजपूतों के १३ एसे उसूल जो हमें पता होने चाहिए 

https://youtu.be/-jYXXBlVyUM
👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻👆🏻लिंक 


Ramsingh sodha

सूरत से किरत बड़ी बिनां पंख उड़ जात सूरत तो जाती रहे पण किरत कबहू न जात,,,,,

कोट खिसै देवऴ दिगै विख ईधण हो जाय जश रा आखर जेहिया जातां जुगां न जाय,,,,

स्व श्री एडवोकेट रामसिंह राणसिह जी समेऴसिहजी सोढा साहब जूना गांव,,,,आरोखी,,,मालदेव,,,, सोढा,,,, नखतराणा कच्छ,,,, गुजरात

एक सेवाभावी छबि ओर उदार सोच के धनी थे,,,,, मिलनसार स्वभाव, उच्च विचार


अपनापन, छोटे से छोटे आदमी को भी इज्जत देना, समाज सेवा में हमेशा आगे आना, असहाय को सहायता करना ऐसे नेक दिल वाले क्षत्रिय को दिल से सत् सत् नमन करते हैं,,,,,,,,वीर भोग्या वसुंधरा,,,,,,,,,,,,,,,


Friday, 23 April 2021

Ramsingh sodha

 सूरत से किरत बड़ी बिनां पंख उड़ जात सूरत तो जाती रहे पण किरत कबहू न जात,,,,,

कोट खिसै देवऴ दिगै विख ईधण हो जाय जश रा आखर जेहिया जातां जुगां न जाय,,,,

स्व श्री एडवोकेट रामसिंह राणसिह जी समेऴसिहजी सोढा साहब जूना गांव,,,,आरोखी,,,मालदेव,,,, सोढा,,,, नखतराणा कच्छ,,,, गुजरात

एक सेवाभावी छबि ओर उदार सोच के धनी थे,,,,, मिलनसार स्वभाव, उच्च विचार

अपनापन, छोटे से छोटे आदमी को भी इज्जत देना, समाज सेवा में हमेशा आगे आना, असहाय को सहायता करना ऐसे नेक दिल वाले क्षत्रिय को दिल से सत् सत् नमन करते हैं,,,,,,,,वीर भोग्या वसुंधरा,,,,,,,,,,,,,,,


केहर लंकी गोरीयां सोढा चतर सुजाण बड झुकियां लांबे तणां आयो गढ अमरांण,,,,, सोढ़ा राणा चंद्र सिंह जी,,,,,, अमरकोट,,

 केहर लंकी गोरीयां सोढा चतर सुजाण बड झुकियां लांबे तणां आयो गढ अमरांण,,

इण,,,धरा सुरंगी धाट,,,,,माथै कवि श्रेष्ठ,,,तेजसीं सांदू ,,,रा फुटकर दूहा,,,सूजा देथा रा,,,सोढां रा झूलणां,,,,अज्ञात कवि रचित ,,,भाखरसी सोढे रा दूहा,जैमलजी झीबा रो ,,,सोढे दोलतसिह रो छंद,,,, महाकवि बांकीदास जी री ,,,हमरोट छत्तीसी,,,,,

कविवरय चिमनजी कवियां री ,,,,,सोढायण,,,,, डॉ शक्ति दानजी कवियां री 

,,,,,धरा सुरंगी धाट,,,,,,,जैडी सधर रचनावां इण ,,,कोम,,,अर भोम री साख भरै,,,,

इणी श्रृंखला में धाट रा वासी श्री ,,,, संग्राम सिंह जी सोढा,,,,,आपरी मातृभूमि रै गौरव ने मंडित करण वाऴी रचना,,,,सोढाण सतसई,,,,,में साहित्यिक, सांस्कृतिक,अर सामाजिक परिवेश नै जिण ऐतिहासिक अर अपणायत री दीठ सूं उजागर करियों है,,,,,,वो वारणा लेवै जैडो है,,,,,,

राणा अमरकोट रा गया जमारौ जीत ,जयांरै मंगल धमल में गवरीजै जस गीत,,,,,,

अमराणो  अमरापुरी ,धरा सुरंगी धाट, सोढा बिराजै राजवी पाट धणी ,,,,परमार,,,,

1000,,,,,,साल पहले ,,,,,,,आबु, बाड़मेर,केराडू,से अमरकोट तक जश परमारां जांण

the great dynasty warriors Sodha parmara   ,,,,,,,,,,,,,, great Rana chandra Singh  Amarkot,,,,,,,,,,,,,,,,,,🙏,,,,,netsingh sodha,,,


Saturday, 17 April 2021

Nangad sodha village manjathiyo jura camp Bhuj ambo

 


Sodha versalsingh mahasinghji jura camp


 

Sodha Rana history

 સોઢા રાણા,,,સોઢા શબ્દ સંસ્કૃત ની સોઢ થી બનેલું છે,જેનો અર્થ થાય છે સખત,કઠણ,સહેસણ,વીર બહાદુર, સોઢા જી વીર પુરુષ હતા, સાખલા નું બીજું નામ વાઘ  અથવા વાઘમ સાખલો હતું, કારણ કે નાની ઉંમરમાં વાઘ નો શિકાર કરેલો હતો, રાજા બાહડરાય ના રાજા છાહડરાય થયા, થોડોક સમય બાડમેર મા રાજ કર્યું, બાડમેર નામ બાહડરાય પરમાર રાજા ઉપર થી પડ્યું છે, અને પછી શિવ કોટડો વસાવ્યું,અને આંબા વાડી મા મહેલ બંધાવ્યો,અને શિવ મંદિર પણ બનાવેલ, કોઇ કારણોસર રાજા છાહડરાય નાં હાથ માંથી બાડમેર સરકી ગયું, અને શિવ કોટડા મા પોતાની રાજધાની સ્થાપી રાજ કરવા લાગ્યા, કર્મ સંજોગો તેમના લગ્ન ઇન્દ્ર ની પરી પહુપાવતી સાથે થયા, જેમાં થી સોઢા જી સાખલાજી ને દેવિ શક્તિ ,,,,સચિયાય,,,(કલ્યાણ કુંવરી)નો જન્મ થયો, એટલે સોઢા,સાખલા, ને સચિયાય દેવી ,,પરી પુત્ર કહેવાય છે, સોઢોજી રાણો,,,,છાહડરાયજી ના પાટવી કુંવર સોઢા જી શિવકોટડા ની ગાદી પોતાના ભાઈ સાખલા ને સોંપી , પોતાના શુરવીર સિપાહી ઓ સાથે સિંધ તરફ રવાના થયા, સવંત ૧૨૨૨ મા રતોકોટ કબજે કર્યો, સોઢા જી બહાદુર લડવૈયા અને બહુજ કુશળ યોધ્ધા હતા, અને તેઓ ,,પરી,,, નાં કુખે થી જન્મેલા હોવાથી જેવા સુરા હતા તેવાજ સુંદર અને ,,, સોહામણા,,,હતા, તેઓ ,અવતારી ,, પુજનીય,,, પુરુષ કહેવાતા હતા, ,,,સોઢો રાણો,,,નામ લેતા કે સાંભળતાં એકચોટ સૌ નાં હૈયાં મા ગૌરવ ઉત્પન્ન થતો,સિંધ અને ઢાટ મા સોઢો,,રાણો,,,નામ રાખી હિન્દુ મુસ્લિમ સૌ ગૌરવ લેતા હતા, લગ્ન પ્રસંગે આજે પણ લગ્ન ગીતો મા સોઢો રાણો , મહેન્દ્રરો રાણો ,ખીહરો રાણો, ના ગીતો હુલામણા થી ગાય છે, ગુઢાર્થ,ગુજારથ,સાખીઓ,ચોપાયો, અને ગીતો મા પણ સોઢા રાણા ને પહેલો નંબર આપેલ છે,,,, સોઢા જી ના આવા પ્રભાવ થી પાછડ થી તેમના વંશજો સોઢા રાણા કહેવાયા, આજે પણ નાના મોટા ને સોઢા કહેવાતાં ગજ ગજ છાતી ફુલાય છે,અને સોઢા શબ્દ ની અમાન્ય જાડવી, પોતાની પાઘડી મા ,,,ઓરખાણ ,જાડવી રાખી છે, કોઈ સમયે મુછ ના વટમા, પછી પાઘડી મા , અને હવે જીભ ની અણી ઉપર સ્થાન છે, સોઢા જી ૧૦૦૦ વર્ષ પહેલાં આબુ નો ઈતિહાસ સોઢાયણ ગ્રંથ,મુહતા નેણસી રી ખ્યાત,બાકિદાસ રી ખ્યાત,ગોરીશંકર ઓઝા લીખીત રાજપુતાના ઈતિહાસ,જનરલ ટોડ લીખીત રાજપુતાના ઈતિહાસ, અમરકોટ ઢાટ થરપારકર સિંધ નો ઈતિહાસ, અમરકોટ રા અગોણા રાણા,,,,બાય નેતસિહ મહાસિહજી સોઢા ઝુરા કેમ્પ ભુજ કચ્છ 🙏🙏#netsinghsodha



Peer shree pithoraji sodha kuldevta


 

Sodha rajput history


 

Sodha rajput 🙏 history



 

Sodha Darbar 🙏

 સોઢા દરબાર,,,,,,મૂળી દરબાર સાચોજી પરમાર ની પ્રતિજ્ઞા,,,,,,,,સાવજ માથે હાથ ફેરવી મૂળી રાજ કહે,,,,,જાઓ વનરાજ,,,, આજે સોઢા પરમારો,,,,, ને મૂળી રાજ ની લાજ રાખી બાપ,,,,,,,, વચન નિભાવવા સિંહ ના પણ કાન ઝાલી ને પકડી લાવે એજ આ ,,,,, સોઢા દરબાર,,,,ની જાત,,,,સાવજ ચાલ્યો ગયો પણ સાવજ ને જોનારા બોલી ઉઠ્યા,,,,,,,આ તો માંડવરાજ,,,,,પોતે જ આવ્યા હતા બાપ,,,,,, સૌરાષ્ટ્ર ની રસધાર,,,, ઝવેરચંદ મેઘાણી,,,,, સોઢા પરમારો નો ઇતિહાસ,,,,,,,,દયા ,દાન ને દાતારી,

માન મર્યાદા ને મોટપ

વટ વચન ને વેર

આ બધા લક્ષણો કુળ મા ઉતરી આવે સાહેબ,

વીરતા ના વાવેતર ના હોય

આ તો ક્ષત્રિય ને વારસા મા હોય,,,,,,જય માતાજી

પીંછા વિના મોર ના શોભે

મોતી વિના હાર ના શોભે

તલવાર વિના વીર ના શોભે

માટે ઝવેરચંદ મેઘાણી લખે છે

મોજ અને મર્દાનગી વિના ,,,, દરબાર ‌,,,ના શોભે,,,,,

સાફા બાંધી સિંહ નથી થવાતું

તલવાર ફેરવી ક્ષત્રિયાણી નથી‌ થવાતું

એક એક પાળિયે ઇતિહાસ લખાણો છે

એમજ કાંઇ ,,, દરબાર,,,, નથી થવાતું,,,જય માતાજી

ગાળ વહેવાર અને પાછળ થી થયેલ ,,,વાર,,, દરબાર ક્યારે ન ભૂલે ,,,હો,,,



Sodha rajput no itihas

 સોઢા દરબાર,,,,,,દોઢા રંગ  તું ને દવુ, સોઢા ‌ બુદ્ધિ સાર, મોઢે ઉજળે દે‌ મને‌ ,,,,પારકરા,,પરમાર,,,,હે બુદ્ધિ વાળા સોઢા પરમાર,,,,,, હસતું મોઢું રાખીને મને સાવજ દેજે,,,,, એટલે હું રાજાઓ ની કચેરી મા તારા દોઢા વખાણ કરતો કરતો જ ,,,, કસુંબો લયીસ,,,,,,,,,, સાંચોજી પરમાર ‌,,,,,,, મૂળી ૨૪c,,,,,,,,(૧) સોવન છાંટા બરસયા,રાસો જંગલ રાવ,આયો રાણો ખીવરો જ્યાં મેહાઉગાવનમાન (૨) છાગળ નાં છાંટા પડયા,સહેલળયો રાણો ખિહરો,તોરણ સામેળે વિચ ,દીના પદરે સો પચાસ,

(૩) કિરત વેળા એ કહાલા,દિત વેળા દોઢાહ,પરણીજે સારી પ્રથવી ગાઈ જૈ સોઢા

(૪) થોહર થોહર દંગડો,વણ_ વણ ચડે રસોડો, હું ‌બલિહારી રાણા ખિહરા,સોઢે સમાન ન કોય(૫) કાશી મથુરા પ્રયાગ ,જગ મા સિસોદા જોય, હું ‌બલિહારી રાણા ખિહરા સોઢે સમાન ન હોય (૬) રાણા ખિહરાજી અમરકોટ રાણા દુરજનશાલજી નાં  દાતાર કુંવર હતા, ઉદારતા,વિરતા વાળા હતા, એટલે કવિઓ એ માંગણો એ ઘણાં વખાણ નાં ગીતો ગાયા છે,,,,રાણા ખિવરાજી ની ધાટ, રાજસ્થાન, કચ્છ, મા ‌સારી છાપ છે ,,,,પગ લાખીણી મોજડી,ભળહળ  ભાલો હાથ,,,,,, રાણા ખિહરાજી અમરકોટ ની ગાદી ઉપર સવંત ૧૪૩૯ મા બેઠા હતા, રાણા ખિવરાજી ના લગ્ન જૈસલમેર ભાટી રાવલ દુદાજી ની કુંવરી સાથે થયા હતા,તોરણ સુરજ પોલ ગેટ મા ઉંચો બાંધેલો હતો,જેથી પહોંચી શકાય નહીં, એટલે રાણા ખિહરાજી એ યુક્તિ કરી ને ઘોડી ને ઉંચી કુદાવી ને રિસમ પૂરી કરી, તેથી રાણા ખિહરા ને અવતારી સોઢા નો ઈલ્કાબ મળેલ છે, ત્યારે આકાશવાણી થઈ વાહ,,,, સોઢા,,, રાણા,,,,વાહ,,,,,વાહ રાણા ખીવરા ,,,,,વાહ,,,,, રાણા ખીવરા જી ના બીજા લગ્ન જામકુવરબા જાડેજા  રાય રાયધણજી  નાં કુંવરી બા સાથે થયા,,,, ત્રીજા લગ્ન કુંવરબાઇ રાઠોડ જેતમાલજી ની કુંવરી બા સાથે થયા,રાણા ખિહરાજી ને સાત રાણીઓ હતી રાણા ખિહરાજી વિરગતિ પામ્યા ત્યારે બધી રાણીઓ सति  થયી હતી,,,, રાણા ખિહરાજી અમરકોટ નું નામ ઈતિહાસ મા અને લોકો ના હ્રદય મા આજે પણ ,,,,અમર,,, છે એવા વીર બહાદુર, દાનેશ્વરી દાદા ને શત શત વંદન,,,,,सुरत से किरत बड़ी बिनां पंख उड़ जात सूरत तो जाती रहे पण किरत कबहू न जात,,,,,, बाय नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏


Sodha parmar itihas

 પારકરા પરમાર,,,,, પરગટિયા ધર પારકર રજ પરાક્રમી રાણ, જિકો ધરા કાજ ઝૂઝિયા સો ધરતી સોઢાણ,,,,

અશ આપે કે અધિપતિ દે ગજ  કે દાતાર સાવજ દે મુ સાવભલ પારકરા પરમાર,,,,

ચંદન ગઢ ચાવો કીયો, જોધે મચાવ્યો જંગ, લડ્યો સાથ ,,, કલ્યાણ ,,,રો ઉવા રાજપૂતો ને રંગ,,,,,

રંગ કલજી રંગ મહાસીગ રંગ સઘળી રેહાણ,રંગ ,,,, કાળુંઝર,,,રા ડુંગરા,રંગ‌હો સોઢા રાણ,,,,,,,,

કલૈ ,,,ચડે હોંકર કરી ,વજી હાક વીરાણ,ગળીયે પડી ,,,તરવટ,,, ગયો,મેલ,,, ફિરંગી માણ,,,,,,,, કાળુઝર,,,અંજશ કરે અંજશે ગઢ,,,,અમરાણ,,,,,

દેસ,,,,પારકર,,,દીપયો પૂર્ણ ગ્રહી પ્રતંગ,,,,કરોડ,,,બગસ, દાંતણ કીયો,રાજા ,,,ચંદણ,,,,રંગ,,,,,,,,,

આપ તણી ધરા ઉજળી કીધી તેં ,,, કલ્યાણ,,,,કરણ,,,,વીજ જ્યું કાટકે, જંગ દઢવાઈ જોવાણ,,,,,,

દોઢા રંગ તુને થવું, સોઢા બુદ્ધિ સાર, મોઢે ઉજળે દે‌ મને‌ પારકરા પરમાર,,,,,

કિરત બાટી કાછબૈ, રંગ રસાળુ રાણ,ધિન સુતન  ધનરાજ રો સો ધરતી સોઢાણ,,,,

માન મરજાદ સિરમૌડ ધરતી ચાવા ધીગ,જશ ગીત રહ્યા જુગા જુગ રંગ ,,,,કલા,,,માસીગ,,,,,,

ધરા શિશ જો ધરૈ,મરે પણ ટેક ના મૂકે,ભાગે સો નહિ લડે,,,,શૂરપદ,,,કદી ન ચૂકે, નિરાધાર કો દેખ દીયે આધાર, આપબલ,ખડગ વચન ઉચાર,સ્નેહ મેં કરે નહીં છલ

પર સ્ત્રીયા સંગ ભેટે નહીં,ધરત ધ્યાન અવધૂત કો, કવિ સમજ ભેદ ,,,પીગળ કહે

યહી ધર્મ રાજપૂત કો,,,,,બાય  નેતસિહ મહાસિહજી સોઢા રાજપૂત ક્ષત્રિય કચ્છ

ભોદેસર ની ભરમા હિન્દુ રહે છે લખહજાર,પણ કલજી જેવા કોઈ નહીં થયા, જેણે ,,,તરવટ,,,,સાથે કરી ,,,તકરાર,,,,,,,,,

खट असुर बीस त्रुटा खगां,हुरावर हलावियो,संमत बारे सो बियासी,,,,सोढो,,,रतेकोट,,,आवियो,,,,,,,,,,,,

केहर लंकी गोरीयां सोढा चतर सुजाण बड झुकियां लांबे तणां आयो गढ अमरांण,,,

गाम गाम कै प्रगटिया सूर संत सुजान,पार नहीं पीरां तणो सो धरती सोढाण,,,,

चावो ठावो छाछरौ ,ऊजऴ गढ अमरांण ,कीरत कह काऴूंझरो,सो धरती सोढाण,,,

पाथुं वरण नै पारकर,आया ने अमरांण,धण धारण नै ,,,धाटडी,,,,सो धरती सोढाण।