Sunday, 18 July 2021

हमरोट छतीसी

 


हमरोट छतीसी,,,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा,,,,


सोढा अमरकोट रां ,सिर कटियां समसेर।

वाहे हणियां बैरहर ,बांका भारथ बैर ।।


एक एक सूं आगला, रांणां अमरकोट।

प्रगट हुवा परमार बै माणीगर मनमोट।।


जस दस दिस ओपी जिकां,लोपी नहं कुल लाज।

     दिया हजारां हेक दिन ,धाट तणां धजराज(घोड़ा) ।।


   रांणां अमरकोट रा , गया  जमारो जीत।

जयांरा मंगल धवल में गवरीजै जसगीत।।


लोक जठै रंको नहीं,नंह संको पर धाट

     सोढां जस डंको घुरै पाधर बंको ,,,,धाट,,,,


राव कला री बार में ,ईडर नगर अनूप।

        ‌‌बारै रायमालरै ,अमराणो इण रुप।।


पूरो सुख हमरोट पुर, लोक न जाणे ढंड।

      छोलां जल ,,,,लांबौ,,,,छिलै बड लागा ब्रहमंड।।


धाट  सुरंगी गोरियां,आदू कहवत एह।

     पदमणियां ,,,हमरोट,,, है,राख म संसो रेह।।


लागां कुसुम सरीस बप,ज्यांरै पड़े खरोट।

        हद नाजक हिरणियां है,मांझल ,,,हमरोट,,,,


घर घर में धीणां घणां,घर घर घुमै माट।

     राग रंग रलियावणो, घरपुड मांझल ,,, धाट,,,,


धन अमरांणो धाट धर,पदमणियां बिण पार।

     सह नारी ,,,,सिकोतरी,,,धरती सिंध धिकार,।।


,,,,लांबै,,,सर पाणी भरै,गोरी गात अनूप।

       ‌ज्यां आगे पाणी भरै,रंभ आलोकिक रुप।।


घुंघट पोलंदी नेहां,बोलंदी पिक बैण।

    ,,,गजगत,,,जावै गोरियां,लांबै सर जल लैण।।


मेहां छतीसां दूहडां , है बरणन,,,,,हमरोट,,,

      आ हमरोट छतीसी का मिनख सुणै ,,,,मनमोट,,,।। कवि श्री बांकीदास जी री


 ख्यात से सोढां परमारां री हमरोट छतीसी,,,, नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत,,,

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