Saturday, 31 July 2021

Sodha rajput itihas

 


सो धरती सोढाण,,,,,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏


कै  गोरा ने पटकिया,घाल नरां घमसाण

     ‌‌ मर मिटिया झुकिया नहीं,सो धरती सोढाण।।


सौरभ बांटी सिंध में,जस लीधौ राजस्थान।

         कीरत छाई कच्छ में,सो धरती सोढाण।।


परगटिया धर पारकर ,रज पराक्रमी राण।

    जिको धरा काज जुझिया,सो धरती सोढाण।।


पुंजराज सिंह पाको पारकर ,मद मेटण मुगलांण।

    चानिया वऴै न चढ़िया,,सो धरती सोढाण।।


अचल सिंह राणपुर हुवौ,रणछोड़ तणौ राण।

        पत राखी प्रजा तणी सो धरती सोढाण।।


गाम गाम कै प्रगटिया सूर संत सुजांण।

    पार नहीं ,,,,पीरां,,,तणौ,सो धरती सोढाण।।


रजवाडी सो रुतबो,अमट रहयो अमरांण।

     पाघ अनमी पारकरां सो धरती सोढाण।।


अमरांणो घणो उजऴो ,गढां हंदो गुमान,

     साखां पोखां सोवणो सो धरती सोढाण।।


संपत,,,सामरोटी,,,घणी,पारकर पाथुं प्राण।

     धरा धाटडी धज भली सो धरती सोढाण।।


आछौ देवऴ अकड़ी,वसे ,,,पिथोरो भाण।

   दरसण करतां दुःख मिटे,सो धरती सोढाण।।


छैल छबीलौ ,,,छाछरो,उजऴौ गढ अमरांण।

     कह कीरत काऴुंझरौ,सो धरती सोढाण।।


पावन धाम पिथल रौ ,उड़े धजा आसमान।

      भगत आवै देस रा सो धरती सोढाण।।

     ‌‌

    बाय नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏🙏

1 comment:

  1. हुकुम सा आपको मेरा प्रणाम।

    में ध्रुवराजसिंह बारिया गुजरात के पंचमहाल से हु।
    शाख सोढा परमार है। कुलदेवी मां माता हर्षद भवानी है।
    में आपको क्षत्रिय बारिया ज्ञाति के बारे में कुछ जानकारी देना चाहता हूं।
    में बताना चाहता हूं कि बारिया क्षत्रिय सोढा परमार के वंशज है।
    राजस्थान के आबू और उसके आसपास के विस्तार में सोढा परमारो का शासन हुआ करता था। जब वहा विदेशी प्रजा ने आक्रमण किया तब वहा से कुछ सोढा परमार गुजरात के पंचमहाल , पावागढ़ , इंद्र प्रदेश , छोटा उदेपुर , दाहोद
    , महीसागर etc … प्रदेशों में आकर बसे।
    यहां के मूल निवासी लोकोने इन सोढा परमारो को बहारिया
    ( गुजराती में इसका अर्थ होता है बाहर से आनेवाले )
    कहा। समय बीतते बीतते यही हमारी पहचान हो गई।
    और बहारिया का बारिया / बारिआ / बारैया हुआ।
    इस प्रकार राजस्थान से आए हुए कुछ सोढा परमार गुजरात में बारिया कहलाने लगे। और हमारे पूर्वजों ने भी यही नाम स्वीकार कर लिया।
    गुजरात के इस क्षेत्र जंगल विस्तार में है। और यह शिक्षा का स्तर पहेलेसे ही निम्न है। इस लिए यहां zaverchand मेघाणी जैसे कवि और बारोट यानी की भट्ट नही हुए। यह आज भी बहोत कम बारोट है।
    इसलिए हमारे पूर्वजों की वंशा वही हम संभाल कर नही रख सके।

    लेकिन हमे आज भी ज्ञात है की हमारे पूर्वज राजस्थान के आबू के सोढा परमार हैं।

    और हमारी बारिया जाति इतनी प्रसिद्ध इसलिए नही हुई क्योंकि इस ज्ञाती का कोई राज्य राजवाड़ा नही था।

    लेकिन हमारे पूर्वज क्षत्रिय बारिया गुजरात में छोटे मोटे जागीरदार , ठाकोर , सेना में सैनिक और राज्य के विभिन्न पद पर रहे।
    और पंचमहल क्षेत्र के ज्यादातर गावो में बारिया ही ठाकोर है।


    मेरी कुलदेवी मां माता हरसिद्धि भवानी मा है।
    लेकिन बारिया समाज में भिन्न भिन्न कुलदेवी है।

    मां सच्या भवानी
    मां अम्बे भवानी
    मां आशापुरा भवानी
    मां शारदा भवानी
    मां चामुण्डा भवानी
    महाकाली मां
    वाघेश्वरी मां।

    हमारे रितिरिवाज वही है जो पहले थे।
    यहां गुजरात में बारिया केवल सरनेम नही है। वह एक उपज्ञाती से पहचानी जाती है। जिसमे यहां के panchmahal, Dahod etc जिले के परमार , चौहान, सोलंकी , गोहिल , जादव ।।।।। Etc जातियां समाविष्ट है।

    तो में आपको प्रार्थना करता हु की बारिया को सोढा परमार की एक खाप के रूप में स्वीकृत करे।

    और यह हकीकत आप अन्य सोढा परमार समुदाय के लोको तक पहुंचाए।
    🙏🏻🙏🏻🙏🏻। जय मां भवानी 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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