ईतिहास सोढा परमार का,,,,शरणागत पंखी रै सारु मरणिया,,,,, जोमबाई आपरै
बेटे ,,,मूंजैजी,,,,ने आज्ञा दी कै,,,बेटा जिको राजपूत सेर सूत धारै उवो जे
शरणाई री रक्षा में शंका करै तो उण ये माज नै में धूड है,आज म्हारो दूध
ऊजलो करण रो अवसर है,,,,, इण अबोल तीतर री रक्षा कर,,,,,,आ मत
सोचजै कै ए घणा थे थोड़ा हो,,,,,जस हमेशा सतधारियां रो रैवै,,,,, राजपूत
तो आगे ई कीरत रै कारण सीस कटावता आया है,,,,, कापिया ज्यां सीस कीर्ती कारण ,क्षत्रियां आगै कहै ,,खंगार,
मां,,,,,,रा ऐ बोल सुण ,,,सोढो मूंजौजी,,,,मरण मतै हुय रण मेदान में आयो
जोर युद्ध हूवो जिण में ,,,सोढे मूंजैजी आपरी खाग रो पाणी बताय ,,,
टणकां रे आडी टग्ग दी,पण पग पाछा नी दिया, एक तीतर पंखी ने
अभ्यदान देवण सारु एक वीर फूंटती मूंछां रे साथै वीरगति वर सरग पूगो
खागां वागां खिर पडै ,परतन छोडै पग्ग
रंग अणी रा रावतां,टणकां आडी टग्ग,।।
जिण वंश में भोज ,जगदे अर विक्रमादित्य जैडा दातार जनमिया उणी उजल
कुल में ,,,,मूंजौ,,,,जनमियो,,,,
जिण कुल में जगदेव जिसा ,भोज जिसा दातार,
जिण कुल बिको जनमियो,अईयो वंश,,,, पंवार,,,,,
इण तीतर री रक्षार्थ हुई लड़ाई रै पेटे ,,,,कवि श्री बांकीदास जी ,आपरी ख्यात में लिखे,,,,,,,,
पडै छवाहड पांचसो सोढा वीसां सात
एकण तीतर वास्ते ईण राखी अखियात,,,,,छवाहडां ना मार पारकरां सोढां मूली लीधी,,,,,,
महादान जी रतनूं आपरी पोथी , यदुवंश जस प्रकाश,,,, में तीतर सारु मरणिये भडां
रो एक जूनो दाखलो इण गत दियो है,,,,,
पैंतालीस पमार मुवा वीस खेर मसाणी ,बार भाटी वरदेव ,त्रण रतनूं खूमाणी
रण चौबीस रायका,सोल लसकरी सिपाई,,,,,,
जंग रचयो चहूं ओर घणा आवे बहु धाई , पटेल पांच सुथार सात,बेढक आठ वजीर अति,,,,,,
रण बांधी खाग रतनेस रो मूंजौ लडियौ महमती,
धिन है ऐडै सतधारी नर नारियां नै जिकै निस्वार्थ भावसूं एक पंखी रै कारण
आपरौ मिनख धर्म और राजपूती धर्म और क्षत्रिय धर्म निभायो सत सत नमन 🙏
बाय नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

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