सोढा राजपूत वेशभूषा,,,,,,,,,नेतसिंह सोढा राजपूत,,,,,,
,,,,धाटेचा,,,,,सोढा,,,,, तथा,,,,पारकरा,,,,, सोढा,,,,,सोढांण _ प्रदेश में ,,,धाट,,,ओर ,,,पारकर,,,,दो जिले आते हैं,यही प्रदेश सोढों का प्रमुख केन्द्र है,
इस प्रदेश के सोढा प्रायः ,,,,वीर,,,, एवं ,,,,दानी,,,,होते आते हैं
यह विशेषता उस प्रदेश की ही रही, जहां इतनी ,,,उदार,,, परंपरा प्रतिष्ठित हूई है,
जिस समय वर्तमान,,,,सोढायण _ प्रदेश पर सोढों का राज्य था,
उस समय ,,,धाट,,,, एवं ,,,, पारकर,,,,का एक ही क्षेत्र था,
,,,,छाहड,,,,के पुत्र,,,, सोढा,,,,से आगे छठी पीढ़ी में ,,,,धरावरीस,,,,( धरा वर्ष)
नामक राजा हूआ,यह ,,,,धरावरीस,,,,, एवं ,,,,,धरापसाव,,,,,, के नाम से प्रसिद्ध हुआ,बड़ा ,,, पराक्रमी,,,,, एवं ,, दानी,,,, था, इसके दो पुत्र हुए,,,,दुरजणसाल,,,
ओर,,,,आसराव,,,,,,,,आसराव के वंशज पारकर के सोढे तथा दुरजणसाल के वंशज,,,,,,धाट के सोढे( धाटेचा) सोढे कहलाये,,,,,,धरा सुरंगी धाट,,,,,,,,
डॉ गौरीशंकर हीराचंद ओझा,राजपूताने का इतिहास, बीकानेर राज्य का इतिहास, प्रथम खंड पृ ७२ ,,,सोढायण पृ ४,,,,,,,,,
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