Thursday, 22 July 2021

Sodha rajput ka itihaas

 


सोढा राजपूत चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य परमार उज्जैन के वंशज हैं,


सोढा राजपूत क्षत्रिय वास्तव में ,,,,, गोत्र,,, में काफी भरोसा करते हैं,


ओर अन्य राजपूत क्षत्रियों में शादी ब्याह करते हैं,,,,,


सोढा एक राजपूत वंश है, सोढा राजपूत परमार वंश की एक शुरवीर शाखा है,


सोढाओ का सीधा संबंध परमार साम्राज्य उज्जैन के साथ है,


आज लाखों की संख्या में सोढा राजपूत ,,, कच्छ गुजरात,,में ,,, सौराष्ट्र में,,,


 राजस्थान,,, में,,, सिंध के थारपारकर की मूल निवासी रहै है,


यह वंश २५०० साल यानी ढाई हजार साल पौराणिक राज वंश है,


इसी वंश में ,,, देवी नेतलदे,,, जिन्होंने हिन्दवा पीर श्री रामदेव जी महाराज से विवाह किया था,


लोकदेवता पाबूजी राठौड़ ने इसी महान वंश में से विवाह किया था,


सोढा राजपूत ,,,नौ कोटी ,,, मारवाड़ धणी राजा ,,,,धरणीवराह के ,,,वंशज हैं,


इसी सोढा वंश में लोकदेवता पीर श्री पिथोराजी दादा ने जन्म लिया था,


यह वंश आगे जाके जग प्रसिद्ध राजा वीर विक्रमादित्य,,,, राजा भोज,,, राजा


 जगदेव परमार,, जैसे सुरवीर दानवीर देव सम्मान राजाओं के वंशज हैं,


सोढाओ का इतिहास जैसा समृद्ध है , वैसे उनका ,,,लोकसाहित्य,, भी निराला है,


यह वंश की ,, लोककथाओ में ,,, सतीत्व,,, वीरता,,,आत्मतेज,,, बहादुरी,, देखने को मिलती हैं,


सोढा राजपूतों की संस्कृति,,,ओर ईतिहास की लोककथाओं में ,,,मुमल रांणो,,,


राणो काछबो,,,राणो रत्न,,,राणो खींवरौ,,,मोर थो टिले राणा,,,,मारा सायर सोढा,


पीर पिथोरा जी के भजन,,,,सोढां री ढाटकी बोली,,,,अमराणै रो सेहर सुठो,,


उथ रहे तो मांहजो मिठो,,,वगेरै लोक कथाओं में देखने को मिलता है,


लोक साहित्य में खास करके,,,, प्रेम,,, शोर्य,,, पराक्रमों की गाथाएं,,,, देखने को


 मिलती हैं,,, ग्रेट डायनासिटी सोढा परमार राजपूत क्षत्रिय,,,,


           बाय,,,, नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

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