सो धरती सोढाण,,,,,,,,नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏
कै गोरा ने पटकिया,घाल नरां घमसाण
मर मिटिया झुकिया नहीं,सो धरती सोढाण।।
सौरभ बांटी सिंध में,जस लीधौ राजस्थान।
कीरत छाई कच्छ में,सो धरती सोढाण।।
परगटिया धर पारकर ,रज पराक्रमी राण।
जिको धरा काज जुझिया,सो धरती सोढाण।।
पुंजराज सिंह पाको पारकर ,मद मेटण मुगलांण।
चानिया वऴै न चढ़िया,,सो धरती सोढाण।।
अचल सिंह राणपुर हुवौ,रणछोड़ तणौ राण।
पत राखी प्रजा तणी सो धरती सोढाण।।
गाम गाम कै प्रगटिया सूर संत सुजांण।
पार नहीं ,,,,पीरां,,,तणौ,सो धरती सोढाण।।
रजवाडी सो रुतबो,अमट रहयो अमरांण।
पाघ अनमी पारकरां सो धरती सोढाण।।
अमरांणो घणो उजऴो ,गढां हंदो गुमान,
साखां पोखां सोवणो सो धरती सोढाण।।
संपत,,,सामरोटी,,,घणी,पारकर पाथुं प्राण।
धरा धाटडी धज भली सो धरती सोढाण।।
आछौ देवऴ अकड़ी,वसे ,,,पिथोरो भाण।
दरसण करतां दुःख मिटे,सो धरती सोढाण।।
छैल छबीलौ ,,,छाछरो,उजऴौ गढ अमरांण।
कह कीरत काऴुंझरौ,सो धरती सोढाण।।
पावन धाम पिथल रौ ,उड़े धजा आसमान।
भगत आवै देस रा सो धरती सोढाण।।
बाय नेतसिंह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏🙏









