#धाट,,,,,#किराडू,,,,,,#पारकर,,,,,#लोदरवौ,,,,,,,,,,#जालोर
#आबू,,,,,,,#पूंगल,,,,,,,#नागोर,,,,,से,,,,,#नवकोटां,,,,,,#मंदोर,,,,
अग्नि वंशी परमार क्षत्रियों का इतिहास उज्जवल रहा है,
लगभग संपूर्ण उत्तर पश्चिम भारत सहित काबूल कन्धार से लेकर काबा तक
परमार क्षत्रियों का एक छत्र शासन रहा।
वीर विक्रमादित्य राजा भोज शीशश दानी जगदेव परमार, यशस्वी राजा ,,,,,चंदन,,,,,
संत शिरोमणि पीर श्री पिथोराजी,अवतारी राणा खींवरा, स्वतन्तत्रता सेनानी बाबू
,,,,,कुंंवरसिह,,,, जैसे अनेकानेक सत पुरुषों ने परमार वंश में कर्तिस्तम्भ को ओर
भी ज्वाजलयमान किया।
क्षत्रियों में परमार वंश ही एक ऐसा वंश है , जिसमें शक्ति ने सात बार अवतार लिया
भगवती सच्चियाय,वांकल देवी,माल्हण माता,सोहाय माता,हंसावती देवी,रुपादे
देवी,ओर लालर देवी 🙏 ये सात परमार शक्ति यां आज भी पूजी जाती है,
इसी परमार वंश के ,,,,, राजा बाहडदेव,,,,, जिन्होंने बाड़मेर की स्थापना की,
इन्हीं बाहडदेव के पुत्र ,,,,, राजा चाहडदेव,,,,,का विवाह संयोग वश इन्द्र की परी से
हूआ था, उन्ही इन्द्र की ,,,,अप्सरा ,,,से ,,,,चाहडदेव,,,,,की तीन संतान हुई,।।
,,,,सच्चियाय,,,,, जिन्हें लगभग सारा परमार वंश अपनी ,,, इष्टदेवी,,,,,,,, कुलदेवी,,,
के रूप में पूजता है, दो पुत्र हुए,,,, सोढा,,,,, ओर ,,,,,,सांखला,,,,, हुए,,,
बहिन शक्ति ,,,,सच्चियाय,,, की कृपा से ,,,,,सांखला जी,,,,, बीकानेर की तरफ चले
गए। ओर उस क्षेत्र में शासन किया, उनके वंशज ,,,, सांखला,,, परमार कहलाते हैं
दूसरे भाई ,,,, सोढा जी,,,,को देवी ने वरदान दिया कि तुम ,,, पश्चिम,,, में जाकर
अपना राज स्थापित करो, देवी के आशिर्वाद से ,,, सोढा जी,,,, ने विक्रम संवत,
१२८२ में सिंध के क्षेत्र के ,,,,रतोकोट,,,,,(रेड फोर्ट) पर रता मुघल को हराकर
अधिकार किया,इस सम्बंध में एक ,,, सवैया,,,, प्रचलित है,,,
शिववाड़ी सच्चियाय आय कहयो सिरेराणी
सोढा उठ खम साज ,,,धाट,,,दियो धणियाणी।।
दल देखें मेल प्रत दाख खाग ऊजऴा खटके।
सोढां मुघलां सुमरां झींक ज वाजयो झटके।।
खट असुर वीस त्रुटां खगां हुरावर हलावियै
सवंत बारह सो बैयासिये ,,,,,सोढोजी,,,,रतेकोट,,,,आवियो
जय मां हरसिद्धि देवी,जय मां सचियाय देवी,जय मां देवलजी,,जय पीर श्री पिथोराजी दादा 🙏🙏🙏🙏🙏नेतसिह महासिंह जी सोढा राजपूत क्षत्रिय मुंबई 🙏

